ना भूलना प्रीत रे ये है प्रेम का रित रे
कही कस्मे कही वादे की है ये तो गीत रे....!
नादानगी की खुशियाँ मन को लुभाती है,
वो मस्ती वो यादें हर पल को जताती है !
कही हँशी तो कही ठीठोली की लहरें,
एक पल की ताजगी हर पल को सजाती है !
ना भूलना प्रीत रे......1
बढ़ते दुनियाँ है समझदारी की नईयाँ ,
जिसमे फँसी है मजधार की खिवैयाँ !
लहरे बड़ी तेज है उस दरिया की ,
जहाँ खुदा है खुद पार की लगईयाँ !
ना भूलना प्रीत रे......2
फुलों सी सजायी यादों की मन बगियाँ ,
महकन सी बनायी प्रेम की पूरबियाँ !
गुनगुनाती हुई दिल भौंरे की कहानी ,
दिलबर सी निभाई आपकी सौरबियाँ !
ना भूलना प्रीत रे......3
बदल रही है दुनियाँ बदल रही है कायनात ,
बदल रही है चाँद शितारे बदल रही है रात !
पर आप कभी ना बदलना ऐ मेरे हमसफर ,
बदलते दुनियाँ के महफिल मे होकर जजबात !
ना भूलना प्रीत रे.......4
"पी एस नंद वर्मा"
👌🏻👌🏻
ReplyDelete...... नि....शब्द..
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