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Sunday, December 26, 2021

निगाहे तेरी

 निगाहे तेरी मेरी ओर ना देखे,

  बनके हवाएं सराबोर ना छेके।


घनघोर घटाओं सी बाल घनेरी,

  तीर नजर कही दूर से ना रोके।।


वो चांदनी वो सितारे सब बिखेरे,

  हर सादगी और लहरे खूब घनेरे।


ये माया भी तुझे पाने को आतुर,

  क्या समयावधी थी आतुर सवेरे।।


कदम-कदम में वो जालिम नजारे,

  एक-एक बात में वो मधुरस संवारे।


थी दीवानगी सी गजब की आहट,

  इतिहास होगये हर पन्नों के प्यारे।।


सीत लहर की शीतल सीत बयार,

  कास फूल की गजरा लिए तैयार।


अब चलने को है मेरी चांद परिंदे,

  पूरी कायनात को करके पलटवार।।



"पी एस नंद वर्मा"

Saturday, December 25, 2021

माटी मोर मितान

 माटी के मितान संगी, कइथे हमर सबो किसान।

माटी के निचोय ले तेल, निकली कहिथे सियान।।


ए कइसन के जमाना हे, अलाली  म मरगे इंसान।

वीरता के काया पलटगे, भाई-भाई काटय कान।।


बाई-बाई  के  जुग  झगरा, महाभारत  होगे  सान।

बाबु करे हमर सियानी, बइठे खावत मोर जवान।।


बने ध्यान  देके   सुनव, भाई रे   नवजवान सैतान।

कामहु तभे खाहू ग, अब माटी संग बदव मितान।।


           "पी एस नंद वर्मा"

शासन दुःशासन

 तोर शासन मोर शासन,

अब सबो होगे दुःशासन।


स्वतंत्रता के ओ बाद ले, अइसन बाढ़त हे आज।

हवाला घोटाला कर, अऊ नवा-नवा अंदाज ले।।


एक हाथ म पइसा दे, दूसरा हाथ म मुजरिम ले।

नई देवस त ऐती आ, ए तोर चेथी के मास ल दे।।


गांधी अजाद ल भुलात हे, हमर संकृति गवात हे।

डिजिटल इंडिया हे, फेर जानवर कस मोटात हे।।


अइसन हे शासन, मंत्री देवत हे मंदहा भाषण।

देश ल पुरा बदलहु, मंदहा लगाए मंत्री आसान।।


सुग्घर होगे संगवारी, कोढ़िया कस लगे बीमारी।

थोकन ए देश के सेती, अब मत होवव सिकारी।।


"पी एस नंद वर्मा"

सुरता के गीत

 मैं सुरता के गीत  लिखत हव,

  तोर बर मया प्रित लिखत हव।


1.

मन बगिया के मन भौंरा गाए,

  पवन पुरबिया सूर ल मिलाए।

    अऊ लागे अइसे राग गंगौटी,

      जइसे हिरदय के ताप जुड़ाए।।


तब बगिया के गीत लिखत हव,

  तोर बर मया प्रित लिखत हव।


2.

चातक कस मैं ह अगोरव,

  चंदा संग ए मया संजोवव।

    चार पहर के सपना सुरता,

      चांदनी संग बिरहा बोवव।।


तब रतिहा के गीत लिखत हव,

  तोर बर मया प्रित लिखत हव।


3.

कोइली कुहके अमा डार ले,

  सूरूज आवय उत्ती पार ले।

    चकमकावत किरन बरसाए,

      फेर आसा दय प्रेम बयार ले।।


तब बिहन्हा के गीत लिखत हव,

  तोर बर मया प्रित लिखत हव।


4.

दिन भर के दिनचर्या बीत गे,

  संझा रानी के रूप खिलगे।

    धिरे - धिरे मया बढ़त जाए,

      चकवा चकवी के प्रेम मिलगे।।


तब संझा के गीत लिखत हव,

  तोर बर मया प्रित लिखत हव।


"पी एस नंद वर्मा"


नया साल

 इसलिये बिति बात काे छोड़ दो !

   नया साल को कुछ नया मोड़ दो !! 


अच्छाई किसमें नहीं है,

  बुराई किसमें नहीं है!

    सबमें कुछ-कुछ है,

      कुछ में कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये ...


सुख किसको नहीं है,

  दुःख किसको नहीं है! 

    सबको कुछ-कुछ है,

      कुछ को कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये...


हँसना किसको नहीं है,

  रोना किसको नहीं है! 

    सबको कुछ-कुछ है, 

      कुछ को कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये...


जीतना किसको नहीं है,

  हारना किसको नहीं है! 

    सबको कुछ-कुछ है, 

      कुछ को कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये...


पाना किसको नहीं है, 

  खोना किसको नहीं है! 

    सबको कुछ-कुछ है,

      कुछ को कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये...


जीना किसको नहीं है, 

  मरना किसको नहीं है!

    सबको कुछ-कुछ है,

      कुछ को कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये...


सदाचारी किसमें नहीं है, 

  दुराचारी किसमें नहीं है! 

    सबमें कुछ-कुछ है, 

      कुछ में कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये...


राजा कौन नहीं है, 

  रंक कौन नहीं है! 

    सबमें कुछ-कुछ है, 

      कुछ में कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये...


शान्ती किसको नहीं है,

  अशान्ती किसको नहीं है! 

    सबको कुछ-कुछ है, 

      कुछ को कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये...


मीठा किसमें नहीं है,

  कड़वा किसमें नहीं है! 

     सबमें कुछ-कुछ है, 

       कुछ में कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये....


"पी एस नंद वर्मा"


मेरे प्रित

ना भूलना प्रीत रे ये है प्रेम का रित रे

 कही कस्मे कही वादे की है ये तो गीत रे....!


 नादानगी की खुशियाँ मन को लुभाती है,

    वो मस्ती वो यादें हर पल को जताती है !

       कही हँशी तो कही ठीठोली की लहरें,

         एक पल की ताजगी हर पल को सजाती है !

                                      ना भूलना प्रीत रे......1


 बढ़ते दुनियाँ है समझदारी की नईयाँ ,

    जिसमे फँसी है मजधार की खिवैयाँ !

       लहरे बड़ी तेज है उस दरिया की ,

          जहाँ खुदा है खुद पार की लगईयाँ !

                              ना भूलना प्रीत रे......2


 फुलों सी सजायी यादों की मन बगियाँ ,

    महकन सी बनायी प्रेम की पूरबियाँ !

      गुनगुनाती हुई दिल भौंरे की कहानी ,

         दिलबर सी निभाई आपकी सौरबियाँ !

                               ना भूलना प्रीत रे......3


 बदल रही है दुनियाँ बदल रही है कायनात , 

    बदल रही है चाँद शितारे बदल रही है रात !

      पर आप कभी ना बदलना ऐ मेरे हमसफर ,

        बदलते दुनियाँ के महफिल मे होकर जजबात !

                                        ना भूलना प्रीत रे.......4


"पी एस नंद वर्मा"

माँ सराश्वती

1. मुखड़ा- 2 ज्ञान देना ज्ञान देना ज्ञान देना वो मांगत हव दाई मोला ज्ञान देना वो अंतरा- 2 ए ब्रह्मा के बेटी सरस्वती वो मैं परत हव पांव सब...