निगाहे तेरी मेरी ओर ना देखे,
बनके हवाएं सराबोर ना छेके।
घनघोर घटाओं सी बाल घनेरी,
तीर नजर कही दूर से ना रोके।।
वो चांदनी वो सितारे सब बिखेरे,
हर सादगी और लहरे खूब घनेरे।
ये माया भी तुझे पाने को आतुर,
क्या समयावधी थी आतुर सवेरे।।
कदम-कदम में वो जालिम नजारे,
एक-एक बात में वो मधुरस संवारे।
थी दीवानगी सी गजब की आहट,
इतिहास होगये हर पन्नों के प्यारे।।
सीत लहर की शीतल सीत बयार,
कास फूल की गजरा लिए तैयार।
अब चलने को है मेरी चांद परिंदे,
पूरी कायनात को करके पलटवार।।
"पी एस नंद वर्मा"
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