माटी के मितान संगी, कइथे हमर सबो किसान।
माटी के निचोय ले तेल, निकली कहिथे सियान।।
ए कइसन के जमाना हे, अलाली म मरगे इंसान।
वीरता के काया पलटगे, भाई-भाई काटय कान।।
बाई-बाई के जुग झगरा, महाभारत होगे सान।
बाबु करे हमर सियानी, बइठे खावत मोर जवान।।
बने ध्यान देके सुनव, भाई रे नवजवान सैतान।
कामहु तभे खाहू ग, अब माटी संग बदव मितान।।
"पी एस नंद वर्मा"
No comments:
Post a Comment