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Wednesday, February 1, 2023

माँ सराश्वती

1. मुखड़ा- 2

ज्ञान देना ज्ञान देना ज्ञान देना वो

मांगत हव दाई मोला ज्ञान देना वो

अंतरा- 2

ए ब्रह्मा के बेटी सरस्वती वो

मैं परत हव पांव सब सेती वो

पद - 2

तहि जग पालन हारी, तहि वीणावादनी वो

तहि मोर ज्ञान देवईया, तहि राग रागनी वो..2

2. मुखड़ा -2

सुर दे सुरताल दे अउ राग देना वो

मांगत हव दाई मोला ज्ञान देना वो

अंतरा- 2

हां दुखिया के तै दुखहारी वो

अंधियारी के तै उजियारी वो

पद - 2

तहि सब कंठ बसैया, तहि सुर संगवारी वो

तहि मोर राह देखईया, तहि पालन हारी वो..2


"पी एस नंद वर्मा"


Wednesday, March 9, 2022

मोर पांखी

मोर पांखी होतिस  त उड़ के आजातेव,

  मैं तोर अंगना म  बईठ के  मया गातेव।


तै मोला भले  एक दो टक मत  निहारते,

  लेकिन मैं तो तोला कई टक निहारतेव।।


बनके कोइली सावन म सुर राग लगातेव,

  एक संग  कई राग  घेरी भेरी गुनगुनातेव।


तै मोर संग भले  कुछु सुर मत सुरियातेच,

  लेकिन मैं तोर बर अब्बड़ सुर सुरियातेव।।


रतिहा म का जोगनी कस बन के उड़ातेव,

  सपना म तोर  ले बईठ के मैं  गोठियातेव।


तै भले मोर  संग एक  नैना मत लड़ातेच,

  पर मैं तोर  संग कई बार  नैना  लड़ातेव।।


भंवरा होतेव  त  पुरा बगिया  घुम आतेव,

  अच्छा से  तोर बर वो  फूल तोड़  लातेव।


तै भले  मोला  झन दे  वो  मोंगरा  गुलाब,

  पर मैं  तोर  बर  सतरंगी  फूल  सजातेव।।


संगवारी  रे  तोर  रुप के  का  खजाना  हे,

  थोकन  निहार   न  आए  तोर  दिवाना  हे।


ऐना  ला देख  के  तोर  भारी  सुरता  आथे,

  मयारू  रे  मोला  तोर  संग घर  बसाना हे।।


                "पी एस नंद वर्मा"





नवा फेसन



   बह रे आदमी  बह रे इन्सान!

   गजब तोर सउख अउ गजब तोर सान!!


1. कुरथा पेंठ नहीं अब मेकरा कस जाला,

      चुंदि चुंदि नहीं  इहा  पड़ा होगे  काला!!

         सब फेसन म बोहागे पुरा दुनिया जिहा, 

            खाय बर दाना नहीं अउ बोर्री भर माला!!

                                         



   बह रे आदमी....


2. इन्टरनेट   मोबाइल  के  बुखार,

        एक झन  पकड़े  टेबलेट  चार!!

            आज  अइसे   स्थिति  आगे   हे, 

                कि अंधवा  करात हे  रोड  पार!!

                                    बह रे आदमी....


3. घर कुरिया जम्मो चिज बेचागे,

      दिखावा  म हवई  जिहाद  चढ़ागे!!

          कुकुर के पुछि कभु सोझ नई होवय,

              ए   ढपोसला   के   जमाना   आगे!!

                                        बह रे आदमी....


4. नवा  संसार  के  लिला  अपार,

        संस्कृति  होगे   आज तार  तार!!

           पुरखा  मन के   ओ  बात  सिरागे,

               जेन रहिस हे   कोनो   दिन सार!!

                                       बह रे आदमी....


"पी एस नंद वर्मा"


Sunday, December 26, 2021

निगाहे तेरी

 निगाहे तेरी मेरी ओर ना देखे,

  बनके हवाएं सराबोर ना छेके।


घनघोर घटाओं सी बाल घनेरी,

  तीर नजर कही दूर से ना रोके।।


वो चांदनी वो सितारे सब बिखेरे,

  हर सादगी और लहरे खूब घनेरे।


ये माया भी तुझे पाने को आतुर,

  क्या समयावधी थी आतुर सवेरे।।


कदम-कदम में वो जालिम नजारे,

  एक-एक बात में वो मधुरस संवारे।


थी दीवानगी सी गजब की आहट,

  इतिहास होगये हर पन्नों के प्यारे।।


सीत लहर की शीतल सीत बयार,

  कास फूल की गजरा लिए तैयार।


अब चलने को है मेरी चांद परिंदे,

  पूरी कायनात को करके पलटवार।।



"पी एस नंद वर्मा"

Saturday, December 25, 2021

माटी मोर मितान

 माटी के मितान संगी, कइथे हमर सबो किसान।

माटी के निचोय ले तेल, निकली कहिथे सियान।।


ए कइसन के जमाना हे, अलाली  म मरगे इंसान।

वीरता के काया पलटगे, भाई-भाई काटय कान।।


बाई-बाई  के  जुग  झगरा, महाभारत  होगे  सान।

बाबु करे हमर सियानी, बइठे खावत मोर जवान।।


बने ध्यान  देके   सुनव, भाई रे   नवजवान सैतान।

कामहु तभे खाहू ग, अब माटी संग बदव मितान।।


           "पी एस नंद वर्मा"

शासन दुःशासन

 तोर शासन मोर शासन,

अब सबो होगे दुःशासन।


स्वतंत्रता के ओ बाद ले, अइसन बाढ़त हे आज।

हवाला घोटाला कर, अऊ नवा-नवा अंदाज ले।।


एक हाथ म पइसा दे, दूसरा हाथ म मुजरिम ले।

नई देवस त ऐती आ, ए तोर चेथी के मास ल दे।।


गांधी अजाद ल भुलात हे, हमर संकृति गवात हे।

डिजिटल इंडिया हे, फेर जानवर कस मोटात हे।।


अइसन हे शासन, मंत्री देवत हे मंदहा भाषण।

देश ल पुरा बदलहु, मंदहा लगाए मंत्री आसान।।


सुग्घर होगे संगवारी, कोढ़िया कस लगे बीमारी।

थोकन ए देश के सेती, अब मत होवव सिकारी।।


"पी एस नंद वर्मा"

सुरता के गीत

 मैं सुरता के गीत  लिखत हव,

  तोर बर मया प्रित लिखत हव।


1.

मन बगिया के मन भौंरा गाए,

  पवन पुरबिया सूर ल मिलाए।

    अऊ लागे अइसे राग गंगौटी,

      जइसे हिरदय के ताप जुड़ाए।।


तब बगिया के गीत लिखत हव,

  तोर बर मया प्रित लिखत हव।


2.

चातक कस मैं ह अगोरव,

  चंदा संग ए मया संजोवव।

    चार पहर के सपना सुरता,

      चांदनी संग बिरहा बोवव।।


तब रतिहा के गीत लिखत हव,

  तोर बर मया प्रित लिखत हव।


3.

कोइली कुहके अमा डार ले,

  सूरूज आवय उत्ती पार ले।

    चकमकावत किरन बरसाए,

      फेर आसा दय प्रेम बयार ले।।


तब बिहन्हा के गीत लिखत हव,

  तोर बर मया प्रित लिखत हव।


4.

दिन भर के दिनचर्या बीत गे,

  संझा रानी के रूप खिलगे।

    धिरे - धिरे मया बढ़त जाए,

      चकवा चकवी के प्रेम मिलगे।।


तब संझा के गीत लिखत हव,

  तोर बर मया प्रित लिखत हव।


"पी एस नंद वर्मा"


माँ सराश्वती

1. मुखड़ा- 2 ज्ञान देना ज्ञान देना ज्ञान देना वो मांगत हव दाई मोला ज्ञान देना वो अंतरा- 2 ए ब्रह्मा के बेटी सरस्वती वो मैं परत हव पांव सब...