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Saturday, December 25, 2021

सुरता के गीत

 मैं सुरता के गीत  लिखत हव,

  तोर बर मया प्रित लिखत हव।


1.

मन बगिया के मन भौंरा गाए,

  पवन पुरबिया सूर ल मिलाए।

    अऊ लागे अइसे राग गंगौटी,

      जइसे हिरदय के ताप जुड़ाए।।


तब बगिया के गीत लिखत हव,

  तोर बर मया प्रित लिखत हव।


2.

चातक कस मैं ह अगोरव,

  चंदा संग ए मया संजोवव।

    चार पहर के सपना सुरता,

      चांदनी संग बिरहा बोवव।।


तब रतिहा के गीत लिखत हव,

  तोर बर मया प्रित लिखत हव।


3.

कोइली कुहके अमा डार ले,

  सूरूज आवय उत्ती पार ले।

    चकमकावत किरन बरसाए,

      फेर आसा दय प्रेम बयार ले।।


तब बिहन्हा के गीत लिखत हव,

  तोर बर मया प्रित लिखत हव।


4.

दिन भर के दिनचर्या बीत गे,

  संझा रानी के रूप खिलगे।

    धिरे - धिरे मया बढ़त जाए,

      चकवा चकवी के प्रेम मिलगे।।


तब संझा के गीत लिखत हव,

  तोर बर मया प्रित लिखत हव।


"पी एस नंद वर्मा"


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