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Wednesday, March 9, 2022

मोर पांखी

मोर पांखी होतिस  त उड़ के आजातेव,

  मैं तोर अंगना म  बईठ के  मया गातेव।


तै मोला भले  एक दो टक मत  निहारते,

  लेकिन मैं तो तोला कई टक निहारतेव।।


बनके कोइली सावन म सुर राग लगातेव,

  एक संग  कई राग  घेरी भेरी गुनगुनातेव।


तै मोर संग भले  कुछु सुर मत सुरियातेच,

  लेकिन मैं तोर बर अब्बड़ सुर सुरियातेव।।


रतिहा म का जोगनी कस बन के उड़ातेव,

  सपना म तोर  ले बईठ के मैं  गोठियातेव।


तै भले मोर  संग एक  नैना मत लड़ातेच,

  पर मैं तोर  संग कई बार  नैना  लड़ातेव।।


भंवरा होतेव  त  पुरा बगिया  घुम आतेव,

  अच्छा से  तोर बर वो  फूल तोड़  लातेव।


तै भले  मोला  झन दे  वो  मोंगरा  गुलाब,

  पर मैं  तोर  बर  सतरंगी  फूल  सजातेव।।


संगवारी  रे  तोर  रुप के  का  खजाना  हे,

  थोकन  निहार   न  आए  तोर  दिवाना  हे।


ऐना  ला देख  के  तोर  भारी  सुरता  आथे,

  मयारू  रे  मोला  तोर  संग घर  बसाना हे।।


                "पी एस नंद वर्मा"





नवा फेसन



   बह रे आदमी  बह रे इन्सान!

   गजब तोर सउख अउ गजब तोर सान!!


1. कुरथा पेंठ नहीं अब मेकरा कस जाला,

      चुंदि चुंदि नहीं  इहा  पड़ा होगे  काला!!

         सब फेसन म बोहागे पुरा दुनिया जिहा, 

            खाय बर दाना नहीं अउ बोर्री भर माला!!

                                         



   बह रे आदमी....


2. इन्टरनेट   मोबाइल  के  बुखार,

        एक झन  पकड़े  टेबलेट  चार!!

            आज  अइसे   स्थिति  आगे   हे, 

                कि अंधवा  करात हे  रोड  पार!!

                                    बह रे आदमी....


3. घर कुरिया जम्मो चिज बेचागे,

      दिखावा  म हवई  जिहाद  चढ़ागे!!

          कुकुर के पुछि कभु सोझ नई होवय,

              ए   ढपोसला   के   जमाना   आगे!!

                                        बह रे आदमी....


4. नवा  संसार  के  लिला  अपार,

        संस्कृति  होगे   आज तार  तार!!

           पुरखा  मन के   ओ  बात  सिरागे,

               जेन रहिस हे   कोनो   दिन सार!!

                                       बह रे आदमी....


"पी एस नंद वर्मा"


माँ सराश्वती

1. मुखड़ा- 2 ज्ञान देना ज्ञान देना ज्ञान देना वो मांगत हव दाई मोला ज्ञान देना वो अंतरा- 2 ए ब्रह्मा के बेटी सरस्वती वो मैं परत हव पांव सब...