बह रे आदमी बह रे इन्सान!
गजब तोर सउख अउ गजब तोर सान!!
1. कुरथा पेंठ नहीं अब मेकरा कस जाला,
चुंदि चुंदि नहीं इहा पड़ा होगे काला!!
सब फेसन म बोहागे पुरा दुनिया जिहा,
खाय बर दाना नहीं अउ बोर्री भर माला!!
बह रे आदमी....
2. इन्टरनेट मोबाइल के बुखार,
एक झन पकड़े टेबलेट चार!!
आज अइसे स्थिति आगे हे,
कि अंधवा करात हे रोड पार!!
बह रे आदमी....
3. घर कुरिया जम्मो चिज बेचागे,
दिखावा म हवई जिहाद चढ़ागे!!
कुकुर के पुछि कभु सोझ नई होवय,
ए ढपोसला के जमाना आगे!!
बह रे आदमी....
4. नवा संसार के लिला अपार,
संस्कृति होगे आज तार तार!!
पुरखा मन के ओ बात सिरागे,
जेन रहिस हे कोनो दिन सार!!
बह रे आदमी....
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