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Saturday, December 25, 2021

शासन दुःशासन

 तोर शासन मोर शासन,

अब सबो होगे दुःशासन।


स्वतंत्रता के ओ बाद ले, अइसन बाढ़त हे आज।

हवाला घोटाला कर, अऊ नवा-नवा अंदाज ले।।


एक हाथ म पइसा दे, दूसरा हाथ म मुजरिम ले।

नई देवस त ऐती आ, ए तोर चेथी के मास ल दे।।


गांधी अजाद ल भुलात हे, हमर संकृति गवात हे।

डिजिटल इंडिया हे, फेर जानवर कस मोटात हे।।


अइसन हे शासन, मंत्री देवत हे मंदहा भाषण।

देश ल पुरा बदलहु, मंदहा लगाए मंत्री आसान।।


सुग्घर होगे संगवारी, कोढ़िया कस लगे बीमारी।

थोकन ए देश के सेती, अब मत होवव सिकारी।।


"पी एस नंद वर्मा"

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