तोर शासन मोर शासन,
अब सबो होगे दुःशासन।
स्वतंत्रता के ओ बाद ले, अइसन बाढ़त हे आज।
हवाला घोटाला कर, अऊ नवा-नवा अंदाज ले।।
एक हाथ म पइसा दे, दूसरा हाथ म मुजरिम ले।
नई देवस त ऐती आ, ए तोर चेथी के मास ल दे।।
गांधी अजाद ल भुलात हे, हमर संकृति गवात हे।
डिजिटल इंडिया हे, फेर जानवर कस मोटात हे।।
अइसन हे शासन, मंत्री देवत हे मंदहा भाषण।
देश ल पुरा बदलहु, मंदहा लगाए मंत्री आसान।।
सुग्घर होगे संगवारी, कोढ़िया कस लगे बीमारी।
थोकन ए देश के सेती, अब मत होवव सिकारी।।
"पी एस नंद वर्मा"
No comments:
Post a Comment