इसलिये बिति बात काे छोड़ दो !
नया साल को कुछ नया मोड़ दो !!
अच्छाई किसमें नहीं है,
बुराई किसमें नहीं है!
सबमें कुछ-कुछ है,
कुछ में कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये ...
सुख किसको नहीं है,
दुःख किसको नहीं है!
सबको कुछ-कुछ है,
कुछ को कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये...
हँसना किसको नहीं है,
रोना किसको नहीं है!
सबको कुछ-कुछ है,
कुछ को कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये...
जीतना किसको नहीं है,
हारना किसको नहीं है!
सबको कुछ-कुछ है,
कुछ को कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये...
पाना किसको नहीं है,
खोना किसको नहीं है!
सबको कुछ-कुछ है,
कुछ को कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये...
जीना किसको नहीं है,
मरना किसको नहीं है!
सबको कुछ-कुछ है,
कुछ को कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये...
सदाचारी किसमें नहीं है,
दुराचारी किसमें नहीं है!
सबमें कुछ-कुछ है,
कुछ में कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये...
राजा कौन नहीं है,
रंक कौन नहीं है!
सबमें कुछ-कुछ है,
कुछ में कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये...
शान्ती किसको नहीं है,
अशान्ती किसको नहीं है!
सबको कुछ-कुछ है,
कुछ को कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये...
मीठा किसमें नहीं है,
कड़वा किसमें नहीं है!
सबमें कुछ-कुछ है,
कुछ में कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये....
"पी एस नंद वर्मा"
बहुत सुन्दर कविराज ����
ReplyDeleteThanks mere bhaiya
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