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Saturday, December 25, 2021

नया साल

 इसलिये बिति बात काे छोड़ दो !

   नया साल को कुछ नया मोड़ दो !! 


अच्छाई किसमें नहीं है,

  बुराई किसमें नहीं है!

    सबमें कुछ-कुछ है,

      कुछ में कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये ...


सुख किसको नहीं है,

  दुःख किसको नहीं है! 

    सबको कुछ-कुछ है,

      कुछ को कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये...


हँसना किसको नहीं है,

  रोना किसको नहीं है! 

    सबको कुछ-कुछ है, 

      कुछ को कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये...


जीतना किसको नहीं है,

  हारना किसको नहीं है! 

    सबको कुछ-कुछ है, 

      कुछ को कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये...


पाना किसको नहीं है, 

  खोना किसको नहीं है! 

    सबको कुछ-कुछ है,

      कुछ को कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये...


जीना किसको नहीं है, 

  मरना किसको नहीं है!

    सबको कुछ-कुछ है,

      कुछ को कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये...


सदाचारी किसमें नहीं है, 

  दुराचारी किसमें नहीं है! 

    सबमें कुछ-कुछ है, 

      कुछ में कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये...


राजा कौन नहीं है, 

  रंक कौन नहीं है! 

    सबमें कुछ-कुछ है, 

      कुछ में कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये...


शान्ती किसको नहीं है,

  अशान्ती किसको नहीं है! 

    सबको कुछ-कुछ है, 

      कुछ को कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये...


मीठा किसमें नहीं है,

  कड़वा किसमें नहीं है! 

     सबमें कुछ-कुछ है, 

       कुछ में कुछ-कुछ नहीं है!! इसलिये....


"पी एस नंद वर्मा"


2 comments:

माँ सराश्वती

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